Shankarji says to Parvatiji – Kamalanane! Now I describe the name Ashtottarashat, listen; The mere offering (recitation or hearing) of which pleases Supreme Goddess Bhagwati Durga.
english translation
शंकरजी पार्वतीजीसे कहते हैं— कमलानने ! अब मैं अष्टोत्तरशत नामका वर्णन करता हूँ, सुनो; जिसके प्रसाद (पाठ या श्रवण) मात्रसे परम साध्वी भगवती दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं I