गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत् । प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् ॥ ९-१८॥
I am the goal, the nourisher, the Lord, the witness, the abode, the shelter, the friend, the origin, the dissolution, the foundation, the treasure-house and the seed which is imperishable.
english translation
गति -- कर्मफल, भर्ता -- सबका पोषण करनेवाला, प्रभु -- सबका स्वामी, प्राणियोंके कर्म और अकर्मका साक्षी, जिसमें प्राणी निवास करते हैं वह वासस्थान, शरण अर्थात् शरणमें आये हुए दुःखियोंका दुःख दूर करनेवाला, सुहृत् -- प्रत्युपकार न चाहकर उपकार करनेवाला, प्रभव -- जगत्की उत्पत्तिका कारण और,जिसमें सब लीन हो जाते हैं वह प्रलय भी मैं ही हूँ। तथा जिसमें सब स्थित होते हैं वह स्थान, प्राणियोंके कालान्तरमें उपभोग करनेयोग्य कर्मोंका भण्डाररूप निधान और अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ अर्थात् उत्पत्तिशील वस्तुओंकी उत्पत्तिका अविनाशी कारण मैं ही हूँ।
hindi translation