तस्यामु ह वा आत्मजान् कार्त्स्न्येनानुरूपानात्मनः पञ्च जनयामास भूतादिरिव भूतसूक्ष्माणि सुमतिं राष्ट्रभृतं सुदर्शनमावरणं धूम्रकेतुमिति ॥ ५-७-२ ॥
Just as the false ego creates the subtle sense objects, Mahārāja Bharata created five sons in the womb of Pañcajanī, his wife. These sons were named Sumati, Rāṣṭrabhṛta, Sudarśana, Āvaraṇa and Dhūmraketu. ॥ 5-7-2 ॥
english translation
जिस प्रकार मिथ्या अहंकार से भूत-तन्मात्र (सूक्ष्म-इन्द्रिय विषय) उत्पन्न होते हैं वैसे ही महाराज भरत को अपनी पत्नी पंचजनी के गर्भ से पाँच पुत्र प्राप्त हुए। इन पुत्रों के नाम थे— सुमति, राष्ट्रभृत, सुदर्शन, आवरण तथा धूम्रकेतु। ॥ ५-७-२ ॥
hindi translation